
रामसेतु पर इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च कोई अध्ययन नहीं करेगा. यह बात आईसीएचआर के नए अध्यक्ष अरविंद जामखेडकर ने कही. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि काउंसिल के सदस्य इसे समर्थन देने के खिलाफ हैं. ना तो हम ऐसा कोई अध्ययन करने जा रहे हैं और ना ही इसकी फंडिंग करेंगे. इस विवाद के बाद एक बार फिर रामसेतु के अस्तित्व को लेकर अक्सर बहस छिड़ गई है. इस बीच आज आपको रामसेतु से जुड़ी कुछ ऐसी सुनी-अनसुनी बातें बता रहा है, जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

रामसेतु को एडम्स ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है. यह श्रीलंका के मन्नार द्वीप से भारत के रामेश्वरम तक चट्टानों की चेन है, जो समुद्र के अंदर है.

रामेश्वरम में आज भी ऐसे कुछ पत्थर मौजूद हैं, जो पानी में नहीं डूबते हैं. बता दें कि रामायण में पानी में ना डूबने वाले पत्थरों का भी जिक्र है.

सबसे दिलचस्प बात तो यह कि स्कंद पुराण, विष्णु पुराण, अग्नि पुराण और ब्रह्म पुराण में राम सेतु का उल्लेख मिलता है.

यही नहीं, सैटेलाइट नासा ने उपग्रह से खींचे गए चित्रों में रामसेतु की चौड़ाई 48 किमी चौड़ी पट्टी के रूप में उभरे एक भू-भाग की रेखा की तरह दिखती है.

ऐसा कहा जाता है कि 15 वीं सदी तक रामसेतु का अस्तित्व था, लेकिन समुद्री तूफ़ान के कारण पानी इसके ऊपर आ गया और कई जगह से यह टूट गया
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