
बच्चों के मैरिट में आने पर या टॉप करने पर पैरेंट्स अक्सर उनकी सफलता को सेलिब्रेट करते तो आपने खूब सुना और देखा होगा, लेकिन कभी अपने सुना है कि बच्चें के फैल होने पर किसी पैरेंट्स ने ग्रैंड पार्टी दी हो। जी हां ऐसा ही एक वाकया देखने को मिला मध्यप्रदेश के सागर जिले में, जहां एक पिता ने 10 वीं बोर्ड में बेटे के फेल होने पर बेटा कहीं डिप्रेशन में आकर गलत कदम न उठा लें इसलिए उसकी असफलता को शानदार तरीके से सेलिब्रेट करते हुए समाज में एक मिसाल पेश की।
डिप्रेशन में न जाए लाडला इसलिए दी पार्टी दरअसल अभी हाल ही में एमपी बोर्ड के नतीजे सामने आए है। जिसमें कई बच्चों ने टॉप किया तो कई बच्चें खराब प्रदर्शन की वजह से इस साल फेल हो गए। इन्हीं में से एक सागर जिले के एक स्कूल का कक्षा दसवीं का छात्र आसू फेल हो गया। उनके परिवार ने उसे डिप्रेशन में जाने से बचाने के लिए बेटे के फेल होने को भी शानदार तरीके से सेलिब्रेट किया। मतलब जिस दौर में बच्चे फेल होने पर परेशान हो जाते हैं और परिवार के प्रेशर का सामना करते हैं उसी दौर में एक परिवार ने अपने बच्चें को प्रेशर से निकालने के लिए उसके फेल होने को भी खूब एंजॉय किया।
निकाला जुलूस 10वीं में फेल हुए छात्र आसू के पिता ने बेटे की असफलता को सेलिब्रेट करते हुए उसे हताशा से बचाने के लिए उसके पिता ने घर के पास ही शामियाना लगवाया और आसपास के लोगों को मिठाईयां बांटकर जश्न मनाया। पिता ने अपने बेटे के फेल होने पर ना सिर्फ जश्न मनाया उसके साथ जुलूस भी निकाला। मिसाल पेश की आसू के पिता और पेशे से सिविल कॉन्ट्रेक्टर सुरेंद्र कुमार व्यास ने बताया कि मेरा बेटा कोई गलत कदम न उठा ले, इसलिए ऐसा किया। मेरी तरह सभी माता-पिता को समझाना चाहिए कि बेटा पढ़ो और अच्छे नंबर लेकर आओ। वो इस जश्न के माध्यम से समाज को संदेश देना चाहते हैं कि अगर हम अपने बच्चे की कामयाबी में उसके साथ हैं तो उसकी असफलता में भी उसका साथ देना चाहिए। अगर कभी बच्चों को असफलता का मुंह देखना पड़े तो हमें उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, न कि उनसे बदसलूकी करनी चाहिए। छात्र आशु का कहना है कि मैं मंगलवार को ही रुक जाना नहीं योजना का फॉर्म भरकर शेष 4 विषयों की पढ़ाई मन लगाकर करुंगा और 10वीं पास भी करुंगा। आसू के पिता की इस सोच की पूरे इलाके में तारीफ हो रही है। उनके इस कदम से उन्होंने सच में समाज में एक मिसाल पेश की है।
ज्यादा खुदकुशी करते है भारतीय युवा शायद सुरेंद्र कुमार ने अपने बेटे के अंदर छिपी हताशा और तनाव दूर करने के लिए ये कदम उठाया। लेकिन इस पहल से हर माता पिता को सीख लेने की जरुरत है। ज्यादातर माता-पिता इस डर को समझ नहीं पाते और लगातार बच्चों पर प्रेशर बनाते रहते है। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया में हर साल तनाव में आकर सबसे ज्यादातर भारतीय युवा आत्महत्या करते हैं। भारत में आत्महत्या 15 से 29 साल की उम्र युवा सबसे ज्यादा आत्महत्या करते है। हाल ही में किए एक सर्वे के अनुसार भारत के 66% छात्रों ने माना कि उनके माता-पिता उनपर अच्छे नंबर लाने के लिए दबाब डालते हैं। और इसी दबाव में आकर हर साल कई बच्चें मौत को गले लगा लेते है।
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