कुलधरा को क्यों कहते हैं इसे देश का डरावना गांव, क्या है यहां की हक़ीकत? - Upyogi Jankari

Wednesday, 30 May 2018

कुलधरा को क्यों कहते हैं इसे देश का डरावना गांव, क्या है यहां की हक़ीकत?

राजस्थान के जैसलमेर के Kuldhara गांव के बारे में सुना है आपने? यदि सुना है तो उससे जुड़ी अफवाहें भी सुनी होंगी. अफवाहें भी ऐसी-वैसी नहीं भूतों के होने की जिसकी वजह से पूरा गांव ही खाली हो गया और अब खंडहर में तब्दील हो गया है.

अफवाहों ने इस गांव को देश के सबसे डरावने गांव के रुप में स्थापित कर दिया है. हालांकि इस गांव के अवशेष इतिहासकारों और पुरात्तव विभाग के लिए शोध का विषय बना हुआ है जो जैसलमेर के वैभव और समृद्दशाली इतिहास को अपने अंदर समेटे हुए है.


कुलधरा गांव को लेकर इन अफवाहों के पीछे एक कहानी है. भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे इस गांव को 1291 में पालीवाल ब्राहणों ने बसाया था. कहते हैं उस समय खूब खुशहाली थी और गांव को आधुनिक तरीके से बनाया गया था. इस गांव के बारे में एक और बात प्रचलित है कि यहां के घरों में कभी ताले नहीं  लगाए जाते थे.


यह 1825 की बात है. गांव के दीवान की बुरी नज़र गांव की एक लड़की पर पड़ी और उसने गांववालों पर उससे शादी का दबाव बनाया. गांववाले इसके लिए तैयार नहीं हुए और बेटी की इज्जत की ख़ातिर 83 गांव के लोगों ने रातों-रात पूरा गांव खाली कर दिया.

कहा जाता है कि बाद में बाकी गांव तो बस गए लेकिन कुलधरा और खाभा गांव नहीं बस पाया. हनुमान जी का मंदिर अब भी इस वीरानगी का साक्षी बना हुआ है.  बस तभी से इस गांव को लेकर अफ़वाहों का बाजार गर्म रहा.

पूरा गांव खंडहर में तब्दील हो चुका है. कहा जाने लगा कि इस गांव में भूतों का डेरा है इसलिए यह दोबारा आबाद नहीं हुआ. जो पर्यटक यहां आते हैं वे अफवाहों के कारण यहां घूमते समय खासतौर पर शाम में रुहानी ताकतों और आवाजों को महसूस करते हैं.

हालांकि अब पुरात्तव विभाग अब इस गांव की शक्ल बदलने की कोशिश में जुटा है जिससे कि पर्यटक बड़ी संख्या में यहां आ सकें. हालांकि पर्यटक अभी भी यहां आते हैं लेकिन पुरात्तव विभाग और जैसलमेर विकास समिति ने इस गांव में हैरिटेज पाथ, पर्यटकों के रहने की व्यवस्था, म्यूजियम और कैफेटेरिया का निर्माण करा रहा है, जिससे कि पर्यटन को बढ़ावा मिले.

इसके लिए करीब 20 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं. तीन साल में इस प्रोजेक्ट के पूरे होने की संभावना है. इससे जैसलमेर के किले, सम के धोरों के बाद यह तीसरा सबसे बड़ा सेंटर हो जाएगा.

कुलधरा आना भी बेहद आसान है. जैसलमेर पहुंच जाएं तो यहां से क़रीब 18 किलोमीटर की दूरी पर है कुलधरा गांव. आप आराम से यहां पहुंच सकते हैं. इस गांव के बारे में फैले वहम को सुनकर हर साल हजारों पर्यटक यहां आते हैं. आप को भी जैसलमेर जाने का मौका मिले तो अफसानों और हक़ीकत के बीच के फर्क को महसूस करना मत भूलिएगा.

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