किस चीज से बनता है कैप्सूल का ऊपरी हिस्सा? जानकर आज से ही कैप्सूल खाना छोड़ देंगे - Upyogi Jankari

Wednesday, 16 May 2018

किस चीज से बनता है कैप्सूल का ऊपरी हिस्सा? जानकर आज से ही कैप्सूल खाना छोड़ देंगे


हम मे से हर किसी ने किसी न किसी रूप मे टैबलेट एवं केप्सूल के रूप में दवाई का उपयोग किया ही होगा। जो लोग मेडिकल क्षेत्र से नही होते हैं तो उनमे से अधिक्तर लोगों का मानना होता है की दवाइयाँ केमिकल्स से बनी होती है। इनमें से कुछ दवाइयाँ इतनी कड़वी होती हैं कि हम में से कई लोग लाख बिमार होने के बावजूद भी दवा खाना पसंद नहीं करते हैं। कैप्सूल अन्य टैबलेट के मुकाबले कम कड़वा
होता है। क्या अपने सोचा है की कैप्सूल कम कड़वा क्यों लगता है?

दरअसल आपने भी देखा होगा तो कैप्सूल का ऊपरी परत प्लास्टिकनुमा मालूम परता है,मतलब अधिक्तर लोग समझते हैं की कैप्सूल का ऊपरी हिस्सा प्लास्टिक का बना होता है। अगर आप भी ऐसे सोचते हैं की कैप्सूल का ऊपरी हिस्सा प्लास्टिक का बना होता है तो आप गलत हैं।
आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैप्सूल का ऊपरी हिस्सा किस चीज से बना होता है। कैप्सूल का ऊपरी हिस्सा जिस चीज से बना होता हो वो जानकर आपमें से कई लोग आज ही कैप्सूल खाना छोड़ सकते हैं।

इस चीज़ का बना होता है कैप्सूल का ऊपरी हिस्सा। जब भी हम टैबलेट या कैप्सूल लेते हैं तो उसके ऊपर उससे सबंधित अधिकतर जानकारी दी गयी होती है जिसे देख कर हम समझ सकते हैं इस टैबलेट में या इंजेक्शन में किस किस तरह के केमिकल्स और दूसरे पदार्थों का उपयोग किया गया है। वहीं अगर आप कैप्सूल के बाहरी परत के बारे में जाने की कोशिश करेंगे तो आप इसमें नाकाम रहे होंगे।इसका कारण यह है की अधिक्तर दवा बनाने वाली कम्पनियां दवा के लेबल पर स्पष्ट रूप से नहीं बताते हैं कि कैप्सूल का ऊपरी हिस्सा किस चीज़ का बना होता है।

दरअसल कैप्सूल का ऊपरी हिस्सा जिलेटिन की मदद से बनाया जाता है। जिलेटिन विभिन्न पशुओं के ऊतकों से तैयार किया जाता है। जिस पदार्थ से जिलेटिन बनाया जाता है वह एक रेशेदार पदार्थ होता है जो गायों और भैंसों जैसे जानवरों की हड्डियों, उपास्थि और कण्डरा में पाये जाते हैं। कैप्सूल के बाहरी परत का जिलेटिन से बने होने की बात तब प्रकाश में आया जब स्वास्थ्य मंत्रालय ने जिलेटिन से बने कैप्सूल की जगह पौधों से बने कैप्सूल बनाने के लिए विशेषज्ञों की एक कमिटी का गठन किया। स्वास्थ मंत्रालय ने इस कमिटी का गठन साल 2016 के मार्च में किया था।

आपको बता दें की यह मामला केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी द्वारा उठाया गया था। इस के अन्तर्गत स्वास्थ्य मंत्रालय को सलाह दी गयी थी के “जिलेटिन कैप्सूल” की जगह पौधों से बने कैप्सूल के इस्तेमाल की संभावनाओं पर गौर किया जाए। इसके बाद ही स्वास्थ मंत्रालय ने कमिटी गठित की है। ज्ञात हो की वर्तमान में बनने वाले कैप्सूल्स में लगभग 98 प्रतिशत दवा कंपनियों द्वारा पशुओं के ऊतकों
से बनने वाले जिलेटिन कैप्सूल का उपयोग किया जा रहा है।

जिलेटिन प्राप्त करने की प्रक्रिया के तहत पशुओं के ऊतक, हड्डियां और त्वचा को उबाला जाता है जिसके बाद जिलेटिन की प्राप्ति होती है जिसका उपयोग कैप्सूल के बाहरी परत के निर्माण मे किया जाता है।जैसा की भारत में बहूल संख्या में शाकाहारी लोग भी हैं इसी को ध्यान में रखते हुए पौधों से कैप्सूल तैयार करने पर शोध किया जा रहा है। वर्तमान कैप्सूल पशुओं से प्राप्त मटेरिअल का बना होता है जो देश के शाकाहारी लोगों की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने वाला है।

इसी को ध्यान मे रखते हुए मेनका गांधी ने कहा था कि जिलेटिन कैप्सूल का इस्तेमाल देश के लाखों शाकाहारियों लोगों की भावनाओं को आहत पहुंचाने वाला है तथा कई लोग इस वजह से कैप्सूल का उपयोग भी नही कर पा रहे हैं। इसी को ध्यान मे रखते हुए सेल्यूलोज़ के इस्तेमाल की बात कही जा रही है। सेल्यूलोज पेड़ों की छालों से निकाले रस और दूसरे केमिकल्स से मिल कर तैयार किया जाता हैं ।

इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ मंत्रालय ने इस बात की सिफारिश की है कि कैप्सुल्स के खोल यानि कैप्सूल के ऊपरी हिस्से को बनाने के लिए जिलेटिन की जगह सेल्यूलोज़ का इस्तेमाल किया जाए। इस सम्बंध में शोध कार्य चल रहा है।

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